• Maa Ka Santaap: A poem by Mani Saxena

     दूर क्षितिज तक  रोशनी का फैला  न कोई उजियारा,चिरकाल की सीमा लाँघता हुआ चला घोर अँधियारा,मुरझा गया एक माँ का लाल, अनमोल फूल वो प्यारा,गगन...

  • Maa Ka Santaap: A poem by Mani Saxena

     दूर क्षितिज तक  रोशनी का फैला  न कोई उजियारा,चिरकाल की सीमा लाँघता हुआ चला घोर अँधियारा,मुरझा गया एक माँ का लाल, अनमोल फूल वो प्यारा,गगन...

  • Santaap: A poem by Rajkumar Gupta

    संताप स्वागत में  देखना कोई कमी न रहने पायेजब आए दुख तो आँखों में नमी न रहने पायेमित्रों दुख से कर लेना दिल की बातें...

  • Santaap: A poem by Rajkumar Gupta

    संताप स्वागत में  देखना कोई कमी न रहने पायेजब आए दुख तो आँखों में नमी न रहने पायेमित्रों दुख से कर लेना दिल की बातें...

  • Ped ka Santaap: A poem by Dr. Aparna Pradhan

     तेज़ हुई आरी की रफ़्तार, पेड़ लगाई सुरक्षा की पुकारकलियों और फूलों ने मानव के पैरों पर गिर कररहम की लगाई गुहार, आंसूओं की भी...

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