संजीदगीवह फूल होता है जो
पेड़ की शाखों के बीच फंसा होने पर भी
अपनी महक चहुं दिशाओं में बिखेरता रहता है और
असंजीदगी
वह कांटा होता है जो
गुलिस्तान की बहारों को
अपने जहरीले तीरों की बौछारों से घायल कर
इस कदर रुसवा कर देता है कि
वह दोबारा कभी खिलखिलाकर हंसने की चेष्टा न करें।
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