विपदा में साथी


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इस दुनिया की भीड़ में
कहने को तो हर आदमी अकेला है,
लेकिन जब सिर पर संकट का
घनघोर अंधकार गरजती बिजली-सा लहराता है,
तो कोई उसकी मदद करे,
यह पुकार तो हर कोई लगाता है।

ऐसा कौन होगा
जो यह नहीं चाहेगा कि
उसके साथ अच्छे लोगों का
एक काफिला जुड़े, लेकिन
हक़ीक़त के धरातल पर
ऐसा कहाँ होता है?

किसी व्यक्ति के हाथ में
बस इतना भर है कि
वह जीवन भर नेक कर्म करे,
भविष्य की चिंता अधिक न करे और
बाकी सब प्रभु-कृपा पर छोड़ दे।

कोई विपदा में साथ न दे तो
भगवान कोई तो रास्ता
अपने भक्त के लिए
खोज ही लेंगे।

इस संसार में अच्छे लोगों की
कोई कमी नहीं,
बस ज़रूरत है कि
कोई ज़रिया हो जो
उनसे मिलवा दे।


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