कितने पल लगते हैं
उस एक पल को भुलाने में
फिर भी वह पल है कि
भूलता नहीं
उस पल से जुड़ी
जो होती है यादें
उनका दायरा तो बढ़ता ही चला जाता है
मैं अपने हजार, दस हजार, लाख
चाहे तो कितने भी साये बना लूं और
उसमें उन सायों से भी ज्यादा दिलों को लगा लूं
फिर भी मेरे हाथ से वह पल
उससे बाहर निकलता छूट पाता नहीं।
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