मेरी कोई भी बात तो
तुम्हें रास नहीं आती
फिर तुम मुझसे
कैसी दोस्ती निभाते हो
मैं भी कुछ बोझिल रिश्तो को
इस वजह से अपनी आत्मा पर ढोती हूं कि
खुद के दिल से उन्हें निकाल
बाहर फेंक पाती नहीं।
मेरी कोई भी बात तो
तुम्हें रास नहीं आती
फिर तुम मुझसे
कैसी दोस्ती निभाते हो
मैं भी कुछ बोझिल रिश्तो को
इस वजह से अपनी आत्मा पर ढोती हूं कि
खुद के दिल से उन्हें निकाल
बाहर फेंक पाती नहीं।
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