कहने को
वह अपने हैं पर
किसी भी दृष्टि से
बोलने के काबिल नहीं
जरूरत के समय भी
मदद के लिए
उन्हें पुकारना नासमझी होगी
जिसने अच्छे वक्त में तुम्हें नहीं पूछा
वह बुरा समय पड़ने पर
तुम्हारा साथ कहां से देने लगा।
कहने को
वह अपने हैं पर
किसी भी दृष्टि से
बोलने के काबिल नहीं
जरूरत के समय भी
मदद के लिए
उन्हें पुकारना नासमझी होगी
जिसने अच्छे वक्त में तुम्हें नहीं पूछा
वह बुरा समय पड़ने पर
तुम्हारा साथ कहां से देने लगा।
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