मुझे
मेरा घर
मेरा शहर जो
मेरा जन्म स्थान भी है
बहुत ही ज्यादा प्रिय है
इस जगह को छोड़कर
मैं किसी परी देश की सैर पर भी
न जाऊं
मेरा सपना इसके आगे का
कोई भी वैभव नहीं है
मेरा घर बेशक हो जाये कभी
एक खंडहर
तब भी मुझे एक महल सा ही लगेगा
मेरा घर मेरी दुनिया है
मेरा मंदिर भी है
इसके पीछे का यही एकमात्र कारण कि
मेरे प्रियजनों से जुड़ी यादें
यहां बसती हैं
मुझे बहुत दुख पहुंचेगा गर
किसी भी कारण यह घर मेरे हाथों से
कभी जो छूटेगा
जिस पल मैं इस दुनिया से
विदा लूंगी
उस दिन मैं वक्त के हाथों
मजबूर होंगी
कभी कोई बुरा समय पड़ा तो
शायद किसी अन्य स्थान पर
मुझे जाना पड़े लेकिन
यह कुछ भी मेरे मन के अनुसार नहीं
होगा
अपना देश छोड़कर जो परदेस
जाना पड़ा
तब तो मेरा हर सपना टूटेगा
स्वर्ग जैसा कोई स्थान हुआ
जहां मेरे बिछड़े हुए अपने
मुझे मिल जायें तो
मेरी खुशी का ठिकाना न रहेगा
यह जीवन
मेरा तो है पर
मेरे नियंत्रण में नहीं
कहां रहना होगा
कैसा जीवन होगा
जब जैसा होगा
तब उसे न चाहते हुए भी
स्वीकार करना ही पड़ेगा।
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