रिश्ता ही तो है
कभी करार वाला
कभी दरार वाला
कभी इकरार वाला
कभी तकरार वाला
कभी मंजिल की तरफ बढ़ता तो
कभी मझधार में फंसाता
रिश्ता ही तो है जो
दो दिलों के बीच है
एक दिल कभी तेज धड़कता तो
दूसरा थोड़ा मद्धम गति से चलता
दोनों आखिर इंसान ही तो है
भगवान तो नहीं जो
कभी कभार
भूले भटके
नासमझी में गल्ती करने की भूल न करें।
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