सीखना तो
जीवन भर चलने वाली
एक प्रक्रिया है
यह उम्र का दरिया
छोटा पड़ जाता है लेकिन
सीखना कभी खत्म नहीं होता
कुछ भी सीखने के लिए
उसमें खुद को पूर्ण रूप से समर्पित
कर देना पड़ता है
इसके लिए अथक परिश्रम करना पड़ता है
खुद के विकारों जैसे क्रोध, अहंकार आदि का त्याग करना पड़ता है
मन को एकाग्रचित करना पड़ता है
अपने शिक्षक या गुरु में
पूरी आस्था रखनी पड़ती है
किसी कार्य को सीखने के लिए
एक निश्चित समय सीमा निर्धारित करनी पड़ती है
संयम बरतना पड़ता है
इधर-उधर से बहुत सारा ज्ञान
बटोरना पड़ता है
अपनी इच्छाओं का दमन करना पड़ता है
खुद पर नियंत्रण रखना सीखना
पड़ता है
सीखने की प्रक्रिया को गंभीरता से
लेना पड़ता है
कड़े अनुशासन का पालन करना
पड़ता है
छोटे से छोटा काम हो या
बड़े से बड़ा काम
सबको सीखने के लिए
एक अग्निपथ से होकर तो गुजरना
पड़ता है
सोने को कुंदन बनाने के लिए
आग में खुद को तपाना पड़ता है
सीखने की प्रक्रिया में
खुद की अशुद्धियों को मिटा करके
स्वयं को चौबीस कैरेट सोने सा
दमकाना पड़ता है।
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