कोई अवधारणा बनाने से पहले


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किसी के बारे में
कोई अवधारणा बनाने से पहले
सामने वाले व्यक्ति को
एक लंबे समय के लिए
जांच परखकर
बहुत ही सावधानीपूर्वक
बिना कोई भ्रम पाले
बिना किसी भेदभाव
बिना किसी ईर्ष्या द्वेष
अपने मन में कोई विचार
उसके बारे में पालें
जीवन का अनुभव मेरा
अब तक का यह कहता है कि
यह ज्यादातर गलत नहीं होती
एक व्यक्ति जो आपके साथ
लगातार बहुत बुरा व्यवहार करता है
वह अन्य किसी व्यक्ति या
व्यक्तियों के समूह के सामने पड़ते ही
आपके साथ शहद से भी अधिक
मीठा व्यवहार करने लगता है ताकि
आपकी कहीं बात पर कोई विश्वास न करे बल्कि
उसी को आपसे बेहतर समझे
आपके सामने कोई समझदार और
सुलझा हुआ व्यक्ति हो तो
यह समस्या उत्पन्न होगी ही नहीं
आखिर में अपने मन को
दृढ़ करते हुए बस इतना
समझायें कि
जिसे जो घिनौना खेल खेलना है
उसे खेलने दें
जिसे जो कहना है
कहने दें
जिसे जो सुनना है
सुनने दें
जिसे जो समझना है
समझने दें
जिसे आगे अफवाहों का
बाजार गरम करना है
करने दें
जिसे पीठ पीछे कुछ और एवं
सामने कुछ और पेश करना है
करने दें
इन सब बेकार के कृत्यों में
उलझकर अपने जीवन का
कीमती समय नष्ट न करें
ऐसे शरारती तत्वों से बचें
एक उचित दूरी बनायें
कम से कम इनकी बातों में उलझें
फिर भी
कभी भूले भटके आमना सामना हो
जाये तो
मैदान छोड़कर भागे नहीं अपितु
व्यवहार कुशलता से उसका सामना करें।


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