आह की चीख


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जिम्मेदारियों से बचने का
एक बहुत ही आसान तरीका है कि
जो गलत व्यवहार आप सामने वाले के
साथ कर रहे हो
उसका दोषारोपण उसी पर करके
खुद को प्रताड़ित दिखाना
यह खेल किसलिए खेल रहे हो
दुनिया को क्या दिखाना चाह रहे हो जबकि
जो व्यक्ति यह सब घृणित कार्य
कर रहा होता है
वह मुंह से चाहे कुछ भी कहता रहे लेकिन
उसे पता होता है
सच की गहराई
रिश्तों की कड़ियों को जोड़ना
चाहिए न कि
उन्हें तोड़ना चाहिए
आदमी जो बुरे कर्म
जानबूझकर करता है
वह आज नहीं तो कल
उसको पूरी तरह से बर्बाद कर देते हैं
किसी की आह जो
दबा दी गई हो की
चीख मरते दम तक
किसी गुनहगार के कानों में गूंजती
रहती है
वह उसे कोई दिन ऐसा आता है
जीवन में कि
उससे आगे फिर चैन से जीने नहीं देती।


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