ऐसा बहुत कम होता है कि
किसी के करीब जाओ और
वह नजदीकियां बनी रहें
वह रिश्ते समय के साथ
गहरे होते रहें और
कोई आपके दिल को आजीवन भाता रहे
कोई भी रिश्ता प्रगाढ़ तभी होता है
जब वह दोनों तरफ से एक दर्पण की तरह
साफ होता है
जहां संवाद चाहे कैसा भी हो लेकिन
दिल की दिल से मुलाकात होती है
मन में ज्वार भाटे की तरह
चढ़ते उतरते भावों को कोई
बखूबी समझ लेता है
जहां कोई आंखों की भाषा
पढ़ लेता है
खामोशी के रेशमी अहसासों की
लिखावट भी कोई
बिना बताये
ज्यों की त्यों जान लेता है
कोई आपको मान देता है
दिल के दर्पण में उतार लेता है
आपको जब वह आपसे ज्यादा जानता है और
अपने से ज्यादा प्यार करता है।
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