एक नई भोर का वादा


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रात सबसे गहरी तब होती है सखी,
जब उसे लगता है अब उसका ही राज है,
पर तभी क्षितिज पर एक हल्की सी लकीर खिंचती है,
और सारा अंधेरा कांप जाता है।
ये उगता सूरज सिर्फ रोशनी नहीं लाता,
ये अपने साथ एक वादा लाता है,
कि जो कल टूट गया था,
वो आज फिर जुड़ सकता है,
जो कल हार गया था,
वो आज फिर जीत सकता है।
देखो सखी, भोर कैसे आती है,
बिना भेदभाव के,
बिना पूछे कि कौन अमीर है, कौन गरीब,
कौन पापी है, कौन पुण्य आत्मा,
वो सबकी खिड़की पर एक जैसी दस्तक देती है,
और कहती है – उठो, तुम्हारे लिए एक नया दिन रखा है।
ओस में भीगे फूल, चिड़ियों का कलरव,
खेतों पर बिखरी सुनहरी चादर,
ये सब गवाह हैं कि
अंधेरा कितना भी लंबा हो,
सवेरा जरूर आता है।
तो हे मन, निराश मत हो,
यदि आज रात है तो कल भोर भी तेरी ही है।


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