आरंभ और अंत के मध्य


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कुछ भी कहीं
आरंभ होता है तो
उसका अंत भी निश्चित है
प्रारंभिक अवस्था में जो स्थिति
होती है
वह समय के साथ
आहिस्ता आहिस्ता परिवर्तित होती है और
अपना रंग व रूप बदलती है
और अंततः अपनी अंतिम अवस्था को
प्राप्त करती है
अंत के पश्चात भी
एक नया आरंभ होता है लेकिन
उसका निर्माण एक नये सिरे से
होता है
आरंभ से अंत की ओर
प्रस्थान करते सफर को
दुनिया की कोई बड़ी से बड़ी ताकत भी
रोक नहीं सकती
जिस प्राणी ने जन्म लिया
इस धरती पर
उसका एक निश्चित समय पर
मृत्यु को प्राप्त करना तय है
जीवन चक्र हो या कोई भी
अन्य चक्र
हर किसी का एक प्रारंभिक
बिंदु है और
एक अंतिम बिंदु भी
जहां यह दोनों मिलें बस वहीं
वह चक्र पूरा हो जाता है
ऐसे अनगिनत चक्रों के
पूर्ण होने की अवधि भी
अलग-अलग है
एक कली फूटती है तो
फूल बनती है
फूल का जीवन पूरा होने पर
वह मुरझा जाता है और
मिट्टी में समा जाता है
फिर उसी मिट्टी से एक नया
पौधा पनपता है
वह आकार प्रकार में
चाहे पहले वाले से अलग होगा
लेकिन होगा वह उससे
काफी हद तक मिलता जुलता ही
कुछ भी खत्म होता है तो
उसकी एक नई ताजगी भरी
शुरुआत भी होती है
आरंभ और अंत के
मध्य जो अवस्था होती है
वह सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि
वह दोनों सिरों को मजबूती के
साथ थामकर
अपने अनुभव के आधार पर
आगे का सफर बड़ी सावधानी से
बखूबी तय करती है।


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