इंसानों की बस्ती से
चलो ऐ मन
कहीं दूर चलते हैं
एक खुशबुओं से लबरेज
फूलों से लदी
कोई घाटी ढूंढते हैं और
उसमें किसी मतलबी दुनिया की नहीं बल्कि
खुद की और मुट्ठी भर सुकून की
तलाश करते हैं।
इंसानों की बस्ती से
चलो ऐ मन
कहीं दूर चलते हैं
एक खुशबुओं से लबरेज
फूलों से लदी
कोई घाटी ढूंढते हैं और
उसमें किसी मतलबी दुनिया की नहीं बल्कि
खुद की और मुट्ठी भर सुकून की
तलाश करते हैं।
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