उम्मीद कभी मरती नहीं


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उम्मीद कभी मरती नहीं

बस थक कर बैठ जाती है

फिर एक किरण देखती है और

फिर से चल पड़ती है

अंधेरे कितने भी गहरे हों

रात कितनी भी लम्बी हो

एक दीया जलता है कहीं

जो कहता है – अभी सुबह बाकी है

गिरते हैं तो क्या हुआ

गिरना भी चलने का हिस्सा है

जो हर बार उठ खड़ा हो

वही तो सच्चा किस्सा है

टूटे पत्ते भी कहते हैं

हम मिट्टी में मिल जाएंगे

फिर नए अंकुर बनकर

इसी धरती पर खिल जाएंगे

तो दिल उदास मत होना

ये वक्त भी गुजर जाएगा

जो आज धुंधला सा है

कल वही चमक जाएगा

क्योंकि

उम्मीद कभी मरती नहीं।


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