तुम बिन: सत्यवती आचार्य द्वारा रचित कविता
दिल कहता है कि तुम यहीं हो,यहीं कहीं.. रसोई में गर्म चाय छानते समय या दूध का बर्तन खाली करते हुए आँगन में कपड़े फैलाते...
दिल कहता है कि तुम यहीं हो,यहीं कहीं.. रसोई में गर्म चाय छानते समय या दूध का बर्तन खाली करते हुए आँगन में कपड़े फैलाते...
The Morning Rays Falling on all spreading hope is a Symphony… The cool breeze blowing to sooth spreading peace -a symphony… Drizzle of rain for...
प्रभात का तेज हो गया अब मद्धम सूर्य रश्मि अब दिखती है अल्पतम तुम बिन ! व्योम से अब नक्षत्रों की वो झिलमिलाहट नहीं चन्द्रमा...
Maa is the only constant in this variable world, For whom we got this beautiful world unfurled. Whose prayers are full of magic, Shadows us...
एक बाजी मारी तो चल दे ताली तन रहे स्वस्थ तो मन भी रहे चंगा और चेहरे पर फैले एक सूरज की आभा सी लाली...
इस होली तुम क्या उपहार लाये हो मेरे लिये ‘रंगों की सौगात’ यह उपहार मेरे लिये सर्वश्रेष्ठ है इस समय मैं अपने जीवन के ऐसे...
दर्द से मिलती पल दो पल को राहत जब लौट जाते बचपन की यादों में मां के स्नेह से लिपटे जो भी उपहार पाये वह...
दिल में कांटो की चुभन बहुत है पर चेहरे गुलाब की कलियों से खिले हैं दर्द की खुद से लिपटी चादर पर रंगों की पिचकारी...
तुम्हें बोलना अभी नहीं है आता लेकिन तुम क्या कहना चाह रही मैं सब समझ जाता तुम्हारे पापा का हूं पापा मैं और तुम्हारा दादा...
Even talking to you was incomplete , How many feelings were distanced from the lips, By the way, we kept on meeting, kept saying anything,...
Endless pain resides inside the heart of the troubled ‘n torn, tattered and battered Climbing a distorted mountain of agony, they find no escape, all...
A grain of mirth collected from everywhere, Still couldn’t oust the lingering pain inside me, What is going wrong I wonder, scratching my head, Only...