Raat din Priyavar ki yaad: A poem by Dr. Suresh Kumar
कुंठित मन की कुंठा मन में कूट-कूट कुम्ह्लाती है. प्राण प्रिये प्रियवर की याद..रात दिन सताती है.. क्षण भर की भी दूरी जो, मन को...
कुंठित मन की कुंठा मन में कूट-कूट कुम्ह्लाती है. प्राण प्रिये प्रियवर की याद..रात दिन सताती है.. क्षण भर की भी दूरी जो, मन को...
कुंठित मन की कुंठा मन में कूट-कूट कुम्ह्लाती है. प्राण प्रिये प्रियवर की याद..रात दिन सताती है.. क्षण भर की भी दूरी जो, मन को...
Stark white hair adorned his wrinkled faceHis empty eyes gaped in infinite spaceNo words he spoke nor heard the chirping birdsAlas! He was blind and...
Stark white hair adorned his wrinkled faceHis empty eyes gaped in infinite spaceNo words he spoke nor heard the chirping birdsAlas! He was blind and...
दिन थक कर जब हारे उसे बेसब्री से रात का इंतेज़ार होता हैऔर फिर ना जाने कितनी दफ़ा वो उसकी नाज़ोंअदा से बेज़ार होता हैधीरे...
दिन थक कर जब हारे उसे बेसब्री से रात का इंतेज़ार होता हैऔर फिर ना जाने कितनी दफ़ा वो उसकी नाज़ोंअदा से बेज़ार होता हैधीरे...
मानस पटल पर अंकित, सृष्टि रचयिता के दो विरोधाभास: सकारात्मकता और नकारात्मकता के दो आयाम | दिन के आरंभ होते ही विहग का कलरव, अंतहीन उड़ान की तैयारी,...
मानस पटल पर अंकित, सृष्टि रचयिता के दो विरोधाभास: सकारात्मकता और नकारात्मकता के दो आयाम | दिन के आरंभ होते ही विहग का कलरव, अंतहीन उड़ान की तैयारी,...
मध्य रात्रि, रोहिणी नक्षत्र में कान्हा हुए अवतरित,बंदीगृह में बेड़ियाँ पहनी देवकी माँ भी हुई हर्षित,चीरता हुआ काली रात, प्रकाश हो गया प्रज्वलित,चतुर्भुज ने दिखायी...
मध्य रात्रि, रोहिणी नक्षत्र में कान्हा हुए अवतरित,बंदीगृह में बेड़ियाँ पहनी देवकी माँ भी हुई हर्षित,चीरता हुआ काली रात, प्रकाश हो गया प्रज्वलित,चतुर्भुज ने दिखायी...
We savor our favorite meals when she toils endlessly in the kitchen, Cradling her sick child in her warm lap she nurses him with utmost...
We savor our favorite meals when she toils endlessly in the kitchen, Cradling her sick child in her warm lap she nurses him with utmost...