किसी भी मजदूर को
ईंट पर ईंट रखकर
घर बनाना बखूबी आता है
यह होती है
उसकी बदकिस्मती कि
यह हुनर होते हुए भी
वह कई बार
संभवत आर्थिक तंगी के कारण
अपना ही घर बना पाता नहीं
उसकी और उसके परिवार की आंखों में अपना घर बनाने का सपना
चाहे हो वह छोटा सा
अवश्य ही तैरता होगा
एक आम आदमी की तरह
उसकी भी तो यह दिली ख्वाहिश
होती होगी कि
उसका अपना एक आशियाना हो
जिसके प्रवेश द्वार पर लटकी हो उसके नाम की ही तख्ती
उसका उसके हर जर्रे पर हो हक और
यह घर महज एक दरो दीवार नहीं बल्कि
हो ऐसा स्थान जहां मिले उसे इज्जत, चैन और आराम।
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