प्रेम के अथाह सागर


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प्रिय ईश्वर
आपसे मिलने की और
आपको जानने की
मन में अति तीव्र इच्छा
आजकल अक्सर जागृत होती रहती है
यूं तो आपका इस सृष्टि के
कण -कण में है वास
फिर भी आपको हमदम ही पाने की
दिल से मिटती नहीं एक अनचाही प्यास
यह प्रेम की प्यास है और
आप तो प्रेम के अथाह सागर ठहरे
आपके रहते
आपके भक्तगणों की यह प्यास
बुझनी चाहिए
उनकी मनचाही मुरादें पूरी होनी चाहिए
उनको आपके साक्षात दर्शन होने चाहिए
उनको आपका सानिध्य हर पल प्राप्त
होना चाहिए
वह जब चाहें आपको अपने समीप
पायें
यह मनोकामना तो एक प्रसाद के रूप में
सहर्ष ही आपको स्वीकार करनी चाहिए
आपके साक्षात दर्शन अपने मां-बाप के
रूप में तो मुझे हो चुके
अब आपके दर्शन की भी अभिलाषा है
आपका रूप कितना सुंदर,
शांत और अनुपम है
काश ऐसा ही एक अंश मात्र
हम मानव जाति का हो पाता तो
हर दिल में प्रभु निवास करते और
उनका आंशिक रूप हर जन के
चेहरे पर विराजता।


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