दिल में बसा मंदिर रोशन होगा तभी


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कोई किसी का हाथ
थामता ही तब है जब
उसे वह दिल से
चाहता बहुत है
वह अपना सर्वस्व उस पर
न्योछावर कर देना चाहता है
आंखों ही आंखों में
उसका हाथ थामे
वह मौन रहकर
उससे बातें करता अनंत है
किसी का प्यार
उसकी मीठी बातों से नहीं बल्कि
उसके व्यवहार से झलक जाता है
दिल से जब दिल का रास्ता होता है तय तो
यह दोनों के दिलों में
एक सुकून भरे
खिलते गुलाब के फूलों से
महकती खुशियों के गुनगुनाते गुलिस्तान भर जाता है
दिल में बसा मंदिर
रोशन होगा तभी
उसमें एक दीपक जलकर
अंधेरा दूर होगा तभी जब
कोई किसी का पूर्ण समर्पण से हाथ थामकर
एक गहरी खामोशी के साथ
उसके समग्र कल्याण के बारे में
एक अगाध भाव रखेगा।


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