एक ही रास्ते परमैं कितनी बार चलती हूं
कभी कहीं जाती हूं
कभी वापिस लौट कर आती हूं लेकिन
कभी देखा जाये तो थकती नहीं
जिंदगी की मंजिल को पाने का रास्ता फिर
मैं क्यों अक्सर
एक घने पेड़ की छाया तले बैठते ही
भूल जाती हूं।
एक ही रास्ते परमैं कितनी बार चलती हूं
कभी कहीं जाती हूं
कभी वापिस लौट कर आती हूं लेकिन
कभी देखा जाये तो थकती नहीं
जिंदगी की मंजिल को पाने का रास्ता फिर
मैं क्यों अक्सर
एक घने पेड़ की छाया तले बैठते ही
भूल जाती हूं।
0 Comments