मोहब्बत से भरी बातें करते हो परमोहब्बत कहीं दिखे
ऐसा कोई काम तो नहीं करते हो
जो भी कहते हो
उसमें लेशमात्र भी सच्चाई
क्या नहीं है तुम्हारे
अपने खुद के होने या मौजूदगी पर
तुम फिर किस तरह से यकीन करते हो।
मोहब्बत से भरी बातें करते हो परमोहब्बत कहीं दिखे
ऐसा कोई काम तो नहीं करते हो
जो भी कहते हो
उसमें लेशमात्र भी सच्चाई
क्या नहीं है तुम्हारे
अपने खुद के होने या मौजूदगी पर
तुम फिर किस तरह से यकीन करते हो।
0 Comments