फूलों के उपवन में
तितली तुम कहां गुम हो
आज का दिन मुझे तुम्हारी ही तलाश में
बिताना है
तुम कहीं भी छिपकर हों बैठी
तुम्हें ढूंढकर
खुली हवाओं के आंचल पर
एक पतंग सा लहराना है
अपने जीवन का यह दिन
मुझे तुम्हें ही समर्पित करना है
तुम मेरे प्यार को
मेरे त्याग को
मेरे समर्पण भाव को
मेरे राग को
मेरे आलाप को
पहचानो या न जानो
मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता
मैं कोई व्यापारी नहीं कि
तुमसे मिलकर मुझे कोई मुनाफा कमाना है
अरे पगली मुझे तुमसे प्यार है पर
तुमने अभी यह नहीं जाना है।
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