जिंदगी की जद्दोजहद में


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जिंदगी की जद्दोजहद में
अपना नाम भूली
ऐसा कौन है जो
पुकार नहीं रहा मुझे
जब मुझे इसका गुमान ही नहीं हुआ और
मैंने पलट के कोई जवाब न दिया तो
इसमें भला मेरा क्या कसूर।


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