जिंदगी की जद्दोजहद में
अपना नाम भूली
ऐसा कौन है जो
पुकार नहीं रहा मुझे
जब मुझे इसका गुमान ही नहीं हुआ और
मैंने पलट के कोई जवाब न दिया तो
इसमें भला मेरा क्या कसूर।
जिंदगी की जद्दोजहद में
अपना नाम भूली
ऐसा कौन है जो
पुकार नहीं रहा मुझे
जब मुझे इसका गुमान ही नहीं हुआ और
मैंने पलट के कोई जवाब न दिया तो
इसमें भला मेरा क्या कसूर।
0 Comments