बच्चे होते हैं
बहुत ही मासूम
फूल से कोमल
शहद से मीठे
उनके स्कूल का शिक्षक भी
उन जैसा ही होना चाहिए
बच्चों के साथ रहकर
उसे भी एक बच्चे सा ही बन जाना
चाहिए
उसमें तरह-तरह के बच्चों की
विभिन्न मानसिकताओं को
समझने की क्षमता होनी चाहिए
उसमें एक अभिभावक
जैसे ही गुण होने चाहिए
खेल-खेल में
उसे बच्चों को शिक्षित करना
आना चाहिए
बच्चों को कभी किसी भी
प्रकार की प्रताड़ना देने से
बचना चाहिए
बच्चे तो होते हैं
बस प्यार के भूखे तो
उन्हें तो हमेशा प्यार ही
परोस कर
प्यार से काबू करने का
गुर हर अध्यापक को
आना चाहिए
किसी भी छात्र को
उसका स्कूल अपना एक दूसरा घर
लगना चाहिए
सुबह घर से स्कूल आने का
उसमें उत्साह होना चाहिए
स्कूल की छुट्टी होने पर भी
वह अपने प्रिय अध्यापकों
को छोड़कर घर न जाना चाहे तो
इससे साबित होती है उस
स्कूल और टीचर की कामयाबी की गुणवत्ता।
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