फूलों के उपवन में


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मां-बाप के सिवाय
हर रिश्ते में मिलावट थी
कड़वाहट थी
बनावट थी
कहीं भी लेशमात्र की सच्चाई नहीं थी
भलाई नहीं थी
इंसानियत नहीं थी
अच्छाई नहीं थी
अपनाहट नहीं थी
कुदरत के भी
न जाने होते हैं
कैसे-कैसे खेल
फूलों के उपवन में
फूल ही महकते दिखते हैं
कैसे जानें
कैसे पहचानें
कैसे समझें कि
इनमें से कौन महक नहीं रहा
कौन है कांटा
कौन है विषैला
कौन है अप्राकृतिक
कौन है बहुरूपिया
यह तो बिल्कुल तय है कि
इनमें से शायद एक भी नहीं
मित्र, हमदर्द या हमराही मेरा।


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