जीत अच्छाई और पराजय अराजकता की


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अराजकता तो आजकल
सर्वत्र व्याप्त है
यह किसी व्यक्ति विशेष को
प्रभावित न करे
यह तो असंभव है
इसका असर किसी पर भी
कुछ विशेष अच्छा तो कदापि नहीं
हो सकता लेकिन
एक अच्छा व्यक्ति अपने भीतर से
कुछ बेहतर ही निकालने की
कोशिश करता रहता है
उसकी परिस्थितियां चाहे
कितनी भी विपरीत और
विषम क्यों न हों
उसका परिवेश या
उसके कारण चाहे वह कितना भी
अव्यवस्थित ही क्यों न हो
अराजकता का माहौल
चाहे उसे एक कमजोर
व्यक्तित्व का व्यक्ति
बनाने पर ही आमादा क्यों न हो
अराजकता और
किसी व्यक्ति के मध्य द्वंद्व
चलता ही रहता है
अराजकता किसी व्यक्ति की
अच्छाई पर वार कर
उसे बुराई की तरफ घसीटती है लेकिन
वह अच्छा आदमी भी एक
जिद्दी आदमी है
वह अपनी अच्छाई की
हिफाजत अपने दम पर
बखूबी करना जानता है
अराजकता का तीर उसे
भेद पाने में खुद को
अपाहिज महसूस करता है
जीत अच्छे इंसान की
अच्छाई की होती है और
पराजय अराजकता जैसी
एक बौनी चीज की।


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