काश
मैंने अतीत से
पलों को जरा अच्छे से चुराया
होता तो
आज उन चुराए हुए पलों से
बना मेरा कैनवास
कुछ बेहतर होता
यह जैसा अब दिख रहा है
वैसा धुंधला न होता
यह जरा चटकीला होता
मैं जो काम भी करती हूं
वह आधे अधूरे करती हूं
तभी तो फिर वर्तमान में
समय पड़ने पर
उन अधूरे चित्रों के लिए
बहुत तरसती हूं
बहुत तड़पती हूं
बहुत रोती हूं
मेरे यह कैनवास जीवंत से नहीं
लगते
इनसे एक भी रंग ख्वाब सा छलकता
नहीं दिखता
इनमें कोई भी बीता हुआ
पल
जीवित रूप में मुझसे
मिलता हुआ नहीं दिखता
लेकिन
चुराए गए पलों के कैनवास का स्वरूप
ऐसा ही होगा हमेशा
यह भी तो सच है कि
कैनवास एक माला के बिखरे
मोती भर होते हैं
यह कोई मोतियों से जड़ी
कोई एक सुंदर पहनने लायक
माला नहीं।
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