घर से बाहर निकलकर
मौसम सुहाना लगा
दोस्तों का साथ जो मिला तो
यह सफर और भी मस्ताना लगा
कहीं सन्नाटा तो
कहीं चहल पहल
हर कदम पर एक नया दृश्य
आंखों को यह सब एक चलचित्र
की तरह रास आने लगा
घर लौटने का समय तो हो रहा है लेकिन
घर वापिस जाने का मन ही नहीं
कर रहा
चलो थोड़ा सा समय और
घर के बाहर ही व्यतीत करते हैं
कुछ रास्ते नये लेते हैं
कुछ कदम उन पर और चलते हैं
कुछ नये और अलग तरह के
अनुभव भी संग अपने
बटोरते हैं
कुछ और चटपटी बातें
करते हैं
कुछ ख्वाब सुनहरे
सांझ की ढलती धूप के
साथ मिलकर बुनते हैं
रास्ते में जो कोई मिलता
जाये
उसका स्वागत करते हैं
घर के बाहर पहुंचकर भी
घर के अंदर
कुछ देर और नहीं घुसते हैं
बाहर खड़े होकर ही
रात के आसमान से
बरसती चांदनी को
पहले अपने घर में
मेहमान बनकर आने की
दावत देते हैं।
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