छायाओं की भी
अपनी एक दुनिया होती है
अपनी एक कहानी होती है
अपनी एक भाषा होती है
खुद की छाया होती है
अपनी जैसी ही
दूसरों की छाया होती है
कुछ छाया बनती दिखती हैं तो
कुछ मिटती हुई दिखती हैं
कुछ अतीत के पलों को
समेटे होती हैं तो
कुछ वर्तमान के सायों तले
सांस भर रही होती हैं
कुछ काली होती हैं तो
कुछ धुंधली सी
छाया जीवित भी होती हैं और
मृत अवस्था में भी
ठीक एक मनुष्य की तरह
उनकी भी अनेक अवस्थाएं हैं
यह छाया कहती है बहुत कुछ
अपना दर्द उड़ेलकर रख देगी
तुम बस इसे जरा सुनने के
लिए अपने को तैयार भर
कर लो
इसकी खामोशी का अर्थ
सही समझना
नहीं समझा तो
यह फिर अपना रौद्र रूप
दिखाना भी जानती है
चीखना चिल्लाना भी
जानती है
अपने हक की लड़ाई को
लड़ना भी जानती है
छाया समझकर इसके
चरित्र के साथ खिलवाड़ मत
करना
इसके साथ कोई खेल मत
खेलना
एक काम जो ठीक से करना कि
इसकी बातों का सही आकलन करना।
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