मेरे ही गीत की रूह सी


0

ऐ बारिश की बूंदों
तुम मोतियों की लड़ियों सी
एक-एक करके
धरती की गोद पर
छम छम करके बरसना और
मैं तुम्हारी लय से
अपना सुर ताल मिलाकर
एक गीत गाऊंगी
तुम हल्के हल्के बरसना ताकि
मेरे गाने की आवाज
दूर वादियों तक जाये
वहां की पहाड़ियों से टकराकर
फिर एक गूंज बनकर
मेरे ही गीत की रूह सी
वापिस आये
तुम्हें भी हवाओं संग उड़ाकर
उस हरी भरी घाटी की
सैर करा लाये
तुम भी अपना कोई गीत
वहां के संगीत प्रेमियों को
सुना देना
ऐसा करते समय
मुझे दिल से याद करती रहना
एक पल के लिए भी न मुझे
भुला देना
मेरा रिश्ता तुम्हारे साथ
सिर्फ गीत और लय तक
सीमित नहीं
यह तो असीमित है
इसे शब्दों में समेट पाना भी तो
मेरे लिए फिर संभव नहीं।


Like it? Share with your friends!

0

0 Comments

Choose A Format
Story
Formatted Text with Embeds and Visuals