यह पल
पानी का एक बुलबुला था जो
आज बन गया कुछ खास
मेरे लिए
यह पल
मेरे लिए बन गया एक दर्पण
जिसमें दिख रही मुझे मेरी छवि और
समय का एक चमकता हुआ बर्तन
मैं खुद को
एक फूल की तरह कहीं
अर्पित कर दूं
मैं खुद को कहीं
पूर्ण भाव से समर्पित कर दूं
मैं बंधन में बंधी रहूं पर
मुक्त हो जाऊं
मैं जीते जी
खुद ही अपना कहीं तर्पण कर दूं।
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