संगीत मुझे सुनने में
बहुत अच्छा लगता है
आनंदित करता है
रूहानी सुकून देता है लेकिन
संगीत की मैं कोई बहुत बड़ी ज्ञाता या
विद्वान नहीं
संगीत के वाद्य यंत्र भी मुझे पसंद हैं लेकिन
गले से जो सुर फूटते हैं
वह मुझे बेहतर लगते हैं
संगीत की साधना करके
आप अपने गले से किसी भी स्वर को
गा सकते हो या
वाद्य यंत्र को बजा सकते हो
कोई संगीतकार संगीत कहां से
सीखता है
कोई न कोई स्रोत या प्रेरणा तो
उसकी अवश्य होती होगी तो
मैं तो किसी संगीतकार से ऊपर
इस प्रकृति को ही एक बहुत बड़ी
संगीतकार मानती हूं
ध्यानपूर्वक देखने पर आप पायेंगे कि
इसके कण-कण में
हर तरह का संगीत, सुर, लय,
ताल आदि विद्यमान है
हवा जब बहती है आहिस्ता आहिस्ता तो कोई
गीत धीमे-धीमे स्वर में गा रही होती है
फूल जब खिलते हैं तो
कोई ताल ठोक रहे होते हैं
पत्तियां जब पेड़ों से गिरती हैं तो
असंख्य साजों को बजा रही होती हैं
झरने जब बहते हैं तो
अपने ही किसी संगीत रचना की
प्रस्तुति दे रहे होते हैं
बादल जब उमड़ते हैं और
बिजली जब गरजती है तो
दोनों मिलकर एक जुगलबंदी सी करते प्रतीत
होते हैं
प्रकृति का संगीत जब
किसी संगीतकार के अंतर्मन में
उतरता है तो
उस पर आधारित किसी
नये गीत संगीत के संसार की
वह रचना करता है
अंत में यही एक निष्कर्ष निकलता है कि
सबसे बड़ा संगीतकार
कोई है तो यह प्रकृति और
इसके जर्रे जर्रे से फूटता है
कर्णप्रिय संगीत भांति-भांति के
वाद्य यंत्रों का।
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