मैं हूं एक नीली चिड़िया
आसमान के नीले आशियाने में
मेरा बसेरा
सुबह मेरी आंख खुलती है तो
हो जाता सवेरा
देर शाम जब आंख बंद होती है तो
छा जाता चारों ओर घनघोर अंधेरा
इस नीले आकाश की तरह
मैं भी अकेली हूं लेकिन
इस आसमान की तरह ही हूं मैं
विस्तृत आकार की
चारों दिशाओं में पंख हों अपने
जैसे फैलाये
सोचती हूं
एक दिन आसमान के रंगों को
चीरकर
जमीन की ओर आहिस्ता आहिस्ता
उतरूं और
इस जहां की सैर कर आऊं
किसी हरे भरे पेड़ के पत्तों की
छांव तले उसकी एक नरम डाल पर
बैठकर
अपने पंख सिकोड़कर
थोड़ा सा सुस्ता लूं
कुछ समय के लिए
अपनी उड़ान को रोकूं
यह होंगे मेरे लिए
अनमोल पल
एक पल एक सदी सा
जो समेटेंगे मुझे मेरी पनाहों तक
जो मुझे मुझसे रूबरू करायेंगे
मुझसे मेरी मुलाकात करवायेंगे जो
अभी तक होना मुमकिन न हो
पाया था।
0 Comments