याद तुम्हारी जब आये
तुम आ जाया करो
बेवजह यूं न मुझे रुलाया करो
दिल के जख्म बन गये हैं अब नासूर
जिन्हें तुम ही भरोगे
तुम ही सुखाओगे
तुम ही मेरे बिगड़े नक्श को तराशोगे, सजाओगे और संवारोगे
तुम जो न आये
अब भी कहीं तो
बिछौने पर मेरे
तुम्हें कांटे ही बिछे मिलेंगे
फूलों की खुशबुओं को खुद से
जुदा करते हुए कहीं उड़ते हुए।
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