भगवान के मंदिर में
जब भी जाती हूं मैं तो
अपने लिए
उनके समक्ष झोली फैलाकर
कुछ नहीं मांगती
हां यह दुआ दिल से
अवश्य करती हूं और
ईश्वर से हाथ जोड़कर
यह मांगती हूं कि
वह इस जगत के हर प्राणी पर
दया करें
उन्हें प्रसन्न रखें
सबको अच्छा स्वास्थ्य दें
दीर्घायु करें
उन्हें किसी न किसी कार्य में व्यस्त रखें ताकि
उनका ध्यान बेवजह इधर-उधर भटके नहीं
मैं प्रभु से यह आशा करती हूं कि
वह मेरी यह मनोकामना अवश्य पूरी करेंगे
मेरे दिल में
आज के युग की
विचित्र परिस्थितियों को देखकर
कभी कभार भय उत्पन्न हो जाता है और
मैं अपने भविष्य को लेकर
चिंतित हो जाती हूं
कभी किसी विपदा से घिर गई तो
कोई साथ देगा या नहीं लेकिन
फिर मन को समझाती हूं कि
वर्तमान में जीना ही सर्वोत्तम हैं
इतना जीवन गुजर ही गया
आगे भी ठीक से व्यतीत होगा
प्रभु की दया दृष्टि बनी रही तो
यह जीवन रूपी भवसागर आसानी से
पार हो ही जायेगा
सपनों की भी एक दुनिया
होती है और
इन्हें आंखों में भरकर
मैं भी एक अपनी अलग ही
सपनों की दुनिया बुनती हूं
बंद आंखों से क्या
मैं तो खुली आंखों से भी
सपने देखना पसंद करती हूं
यह जीवन छोटा है तो
मेरे सपने भी बहुत छोटे और
मासूम से हैं
यह भी रंग-बिरंगे फूलों से अनगिनत हैं जो
एक उपवन की सेज पर सजे हैं
इन आंखों को जो भी दिखता है
वह उसको लेकर ही कोई सपना
बुनने लगती हैं
इस तरह के दिलचस्प खेल
खेलने से ही तो
यह जीवन फिर बन जाता है
स्वर्ग से भी अधिक सुंदर।
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