मैं तो एक मोर हूं जो


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आज रात मैं एक सपना
देखूंगी
देखती हूं कि
कल वह पूरा होता है या कि नहीं
कल पूरा नहीं हुआ तो
कल रात फिर देखूंगी कि
परसों पूरा होता है या कि नहीं
यह सिलसिला उस सपने को
देखने का
तब तक चलेगा बदस्तूर जब तक
वह सपना पूरा नहीं हो जायेगा
सौ प्रतिशत बेशक न हो पूरा
आंशिक रूप से कुछ प्रतिशत
हो जाये
तब भी मैं हो जाऊंगी
संतुष्ट
मैं तो एक मोर हूं जो
बड़ी आशा से देखता रहता है
आसमान के बादलों की तरफ कि
कब यह बरसें और
कब वह पंख फैलाकर नाचे
यह बूंद बूंद करके भी बरसे
तब भी वह पूरे जोश से
नाचेगा और
कहीं नहीं भी बरसे
तब भी उसे नाचने से
कोई रोक नहीं पायेगा।


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