मेरे साथ चल रही परछाइयां


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अतीत की
श्वेत व श्यामल परछाइयों में से
मैं जिंदगी के आगे का सफर
तय करने के लिए
श्वेत और
जिंदगी का अनुभव बटोरने के लिए
श्यामल परछाइयाों का उपयोग
करती हूं
खुद को एक सशक्त आधार प्रदान
करती रहती हूं ताकि
मैं खुद के पांव अपने ही
आधार पर टिकाकर
अब नई बन रही परछाइयों को
साथ लेकर
अपनी जिंदगी के सफर पर
आगे
हौसला खुद में भरकर
चल सकूं
मुझे किसी का साथ मिले या
न मिले लेकिन
अंत में चलना अपने
दम पर ही है
जिंदगी की राह में लोग
मिलते रहते हैं और
बिछड़ते रहते हैं लेकिन
मैं खुश हूं कि
जब तक मैं हूं
मेरे साथ चल रही परछाइयां
मेरा दामन कम से कम
नहीं छोड़ती
मुझे थामे रहती हैं
हर घड़ी
सुख में और
दुख में भी
मैं प्रयत्नशील हूं कि
अब तक की तय यात्रा में
यह जो बनती थी
श्वेत व श्याम रंगों की तो
अब आगे के समय को
उज्जवल करती
यह बनें मेरी पसंद के अनुसार
सिर्फ और सिर्फ
सुनहरे और चमकीले रंग की ही।


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