मैं खुश क्यों नहीं हूं
इसके लिए कौन है जिम्मेदार
मैं या कोई अन्य
जहां तक है
शायद मैं ही
खुद की भावनाओं पर
मेरा क्यों नहीं है नियंत्रण
अपने दिल के कमरे की चाबी
मैं क्यों थमा देती हूं
बारी बारी से
कभी इसके हाथ तो
कभी उसके
मैं ही क्यों नहीं रखती
अपने ताले की चाबी को
संभालकर
क्या कारण है जो
मैं अपने दिल के दरवाजे को
बेवजह खटखटाने की स्वतंत्रता देती हूं
किसी को
एक हद क्यों नहीं तय करती
मैं दूसरों के लिए
मेरा घर
मेरा आसमान
मेरी पतंग
मेरी डोर
मेरी अंगुलियां
कौन होता है फिर कोई अन्य
जो बिना मेरी इजाजत
मेरी पतंग उड़ाने की जुर्रत करे।
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