जिसने जितना किया
तुम उसका उतना भर तो
शुक्रिया अदा करो
तुम उससे उम्मीद तो
हर समय बांधे रखते हो
यह बताओ
तुमने कभी उसके लिए
इन कामों के बदले में क्या किया
थोड़े में
गर तुम्हें संतुष्टि नहीं तो
इस दुनिया के लोगों के नहीं बल्कि
भगवान का घर तलाशो
उसकी भक्ति करो
आराधना करो
उसकी आस्था में प्रेम का दीपक जलाओ
इस दुनिया से अपना ध्यान
हटाओ
भगवान की भक्ति में अपना पूरा
चित्त लगाओ
क्या पता
तुम्हारी तपस्या का फल
किसी पल भगवान तुम्हें प्रसन्न
होकर दे दें।
0 Comments