पतझड़ कहे
बहार से कि
तू लौट आ जल्दी कि
तेरे बिना
उदास है मन
तू होती है जब पास तो
बंध जाती है जीवन में
हर छोटी बड़ी आस
तू होती है करीब तो
सुंदर लगती है
प्रकृति की हर छटा
तू होती है नजदीक तो
एक जीवंत सपने सी सजती है
इस कायनात की हर
तस्वीर।
पतझड़ कहे
बहार से कि
तू लौट आ जल्दी कि
तेरे बिना
उदास है मन
तू होती है जब पास तो
बंध जाती है जीवन में
हर छोटी बड़ी आस
तू होती है करीब तो
सुंदर लगती है
प्रकृति की हर छटा
तू होती है नजदीक तो
एक जीवंत सपने सी सजती है
इस कायनात की हर
तस्वीर।
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