तुम पुकारते ही नहीं मेरा नाम


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तुम पुकारते ही नहीं
मेरा नाम
सदियां बीती
भूल गये मेरी पहचान
दिल के तुम्हारे करीब रहती हूं
इसका मतलब यह तो नहीं कि
मुझे पूरी तौर पर नकार दिया जाये
मैं तुम्हें खुद से ज्यादा प्यार करती हूं
इसका अर्थ यह नहीं कि
मेरे प्यार को ठोकर मार कर ठुकरा दिया जाये
अभी तक तो मैं तुम्हारी गलतियों को
माफ करती आई हूं
आगे भी करती रहूंगी
इसका वादा नहीं कर सकती
तुम समय रहते पहचानो
बहारों के सायों को अन्यथा
रहो तैयार
पतझड़ की मार निरंतर ही
ताउम्र झेलने को।


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