मेरे लिए घर
महज ईंट गारे से बनी
कोई बिल्डिंग या मकान आदि नहीं बल्कि
मेरे लिए घर
एक पूजा स्थल है
एक मंदिर है
एक दुनिया है
मेरी उम्मीदों का एक जलता हुआ दीया है
मेरी रूह को हरदम सुकून
पहुंचाता एक चंदन का बन और
एक फूलों का सुबह शाम
महकता गुलशन है
मेरे घर में
मेरा बचपन खेलता है
मेरी जवानी पलती है
मेरी उम्र का दरिया
आहिस्ता-आहिस्ता बहता है
मेरे घर के कोने-कोने में
मेरे मां-बाप की यादों का
बसेरा है
मेरी जिंदगी का हर गुजरा
पल हर सुबह अंगड़ाई
भरकर मेरे साथ आंख
खोलता है
इस घर के जर्रे-जर्रे में बसी
अपनी और अपनों की
यादों को आंखों से दिल में
उतारकर मैं सोती हूं
अपने ख्वाबों में भी
घर से जुड़े हर एक
सुनहरी अहसासों को जीती हूं
मुझसे न पूछे कोई कि
घर मेरे लिए क्या है
यह मेरी जन्मस्थली
कर्मस्थली और
मृत्यु शय्या है
यह मेरी जिंदगी का आगाज
मेरी जिंदगी का हर पड़ाव और
मेरे जीवन का अंजाम या फिर अंतिम यात्रा है।
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