परसों मैं अपनी एक परम मित्र के साथ उनके किसी परिचित की बेटी के महिला संगीत में गई।
वहां का वातावरण एक सुखद अनुभूति प्रदान कर रहा था। वहां एक महिला से भेंट हुई जो मेरे लिए तो अपरिचित थी लेकिन उनसे बातचीत करके कोई परायापन नहीं लगा। ऐसा महसूस हुआ कि मैं उन्हें न जाने कितने लंबे समय से जानती हूं। वह जो भी बोल रही थी उसमें सच्चाई थी। उनका यह अंदाज मुझे भा गया। मैंने उनके मृदु व्यवहार के कारण उनके बारे में जानने की थोड़ी सी उत्सुकता भरी पहल करी।
वह पिछले आठ-नौ साल से शादीशुदा थी। एक बैंक में कार्यरत लेकिन एक संतान के सुख से वंचित। मेरे पूछने पर कि उनका वैवाहिक जीवन कैसा चल रहा है? इसपर उनका बेबाक जवाब था कि वह कोई खास खुश नहीं हैं। हर बात में समझौता करने पर ही थोड़ा बहुत इस रिश्ते को घसीटा जा रहा है। ससुराल वाले थोड़े संकीर्ण विचारधारा के हैं।
सास ने घर में एक कुत्ता पाल रखा है जिसके कारण एक बार उनकी एक टांग की हड्डी भी टूट चुकी थी। कुत्ता कभी बेड पर तो कभी मेज पर तो कभी कुर्सी पर चढ़कर बैठा रहता है। घर में हर समय खुला घूमता है जिसे वह थोड़ा नापसंद करती हैं। सास बोलती प्यार से हैं और कुत्ते के लिए मोटी रोटियां न बनवाकर पतली रोटियां एक बड़ी तादाद में बनवाती हैं। वह इस्तेमाल भी नहीं होती और इधर-उधर बिखरी रहती हैं।
मैंने भी मन ही मन सोचा कि यह बातें सुनने में लगती बेशक छोटी-मोटी और हास्यास्पद हैं लेकिन जिसपर बीतती हैं उसे बहुत तकलीफ देती हैं।
मेरा मानना तो यह है कि घर में एक छत के नीचे स्वर्ग बनाने के लिए समस्त सदस्यों को एक दूसरे की भावनाओं का भरपूर सम्मान करना चाहिए। किसी भी बात चाहे वह छोटी हो या बड़ी से यदि किसी को परेशानी हो तो उसे हल्के में न लेकर उस समस्या का तत्काल समाधान निकालने का प्रयत्न करना अति आवश्यक है और हां उसे उपयोग में लेना भी जरूरी है।
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