कल मैं खुद से खफा थी


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कल जो बीता
उसका रंग
आज के दिन से
अलग था
जुदा था
फर्क था
कल मैं खुद से खफा थी
आज मेरा दिल एक बच्चे सा
मेरे मासूमियत भरे अहसास पर
बेतहाशा हंसा था
कभी मैं जिंदगी के रास्तों में
उलझकर रह जाती हूं
कभी मैं एक छलांग में
अपने सपनों की मंजिल पा जाती हूं
किसी दिन मेरे दिल का सा
हो जाता है तो
किसी दिन नहीं भी
क्या फर्क लेकिन देखा जाये तो
पड़ना चाहिए
जब तक कोई है
उसे जिंदगी उसकी
जैसा चलाये
उसे चलना चाहिए।


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