मैं पहले भी खामोश थी और
आज भी खामोश हूं
आगे भी खामोशी की चादर ओढ़े रखूंगी
कल और आज में लेकिन एक बहुत बड़ा परिवर्तन मेरे भीतर आया है
पहले मैं कहीं दुनिया की उथल-पुथल से भयग्रस्त रहती थी
खामोश रहकर मैंने अपने आसपास जो कुछ भी घटित हो रहा है
उसे बहुत बारीकी से देख परखकर और सीखकर अपने आचरण में उतारा है
आज मैं खुद को भीतर से बेहद शक्तिशाली महसूस करती हूं और
जीवन की किसी भी बाधा का बखूबी सामना कर सकती हूं।
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