सुना है कि
कीचड़ में कमल खिलता है
मेरे मन की पोखर में भी
कीचड़ में कमल खिलने का भरसक
प्रयत्न करता रहता है
वह खिलने को होता है लेकिन
फिर उस पर कोई कीचड़ उछालकर
उसे खिलने से रोकता है
इस दुनिया में किसी पर कीचड़ फेंकने वालों की
कमी नहीं है
कमल निरंतर प्रयासरत है लेकिन
वह हर समय इस समस्या के भंवर से
बाहर आने का समाधान भी खोजता
रहता है
अब चाहे वह अधिकतर विफल ही
क्यों न होता रहे।
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