एक संयमित आचरण


0

आजकल का समय ही कुछ ऐसा विपरीत है कि घर हो या बाहर आप कहीं भी खुलकर कुछ बोल नहीं सकते।समझदार लोग अधिकतर अपना मुंह बंद करके रहने में ही अपनी भलाई समझते हैं। मैं भी इसी श्रेणी में आती हूं लेकिन कभी भूले भटके तो किसी के मुंह से कुछ निकल भी जाता है। वैसे देखा जाये तो वह अमुक व्यक्ति गूंगा थोड़े ही ना है।
मैंने कहीं अपने भाई से अपनी दोस्त अर्चना के बारे में यह कह दिया कि वह मेरा बहुत ख्याल रखती है। बस यह सुनते ही उसने कहा कि वह तो पागल है। मेरी लड़कियों की तो उसने फिजूल की बातें समझा समझाकर जान ले ली। यह कहते हुए उसके चेहरे पर घृणा के उभरते भावों को साफ महसूस किया जा सकता था।
मुझे इस तरह के उसके व्यवहार पर थोड़ा अचंभा हुआ। मैंने कहा कि उसने तो इतना भर कहा था कि आजकल के बच्चों को यह समझना आवश्यक है कि पढ़ाई के साथ-साथ समय पर विवाह कर परिवार को भी साथ लेकर चलना ठीक रहता है।
इस पर उसका कहना था कि आजकल के बच्चे अपनी मर्जी के मालिक होते हैं। किसी की एक बात नहीं मानते हैं।
मैंने मन ही मन सोचा कि इस तरह के लोगों से क्या उलझना। ऐसे बच्चों को तो छोड़िए, उनके अभिभावकों को भी कोई कुछ समझा नहीं पायेगा।
अर्चना शायद मेरे भाई के बच्चों से पहली बार मिली थी और उसने ऐसे ही उनसे बात करने की थोड़ा सी कोशिश या गलती कर ली थी।
हम सब तो सुधरे हुए हैं लेकिन अपने बच्चों को अभिभावकों ने एक संयमित आचरण करना नहीं सिखाया तो आने वाला कल इन सबके लिए घातक ही सिद्ध होगा।


Like it? Share with your friends!

0

0 Comments

Choose A Format
Story
Formatted Text with Embeds and Visuals