एक किताब या एक लेखक तक सीमित नहीं हो जाना चाहिए


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मेरी कोई पसंदीदा किताब नहीं है
और न ही कोई पसंदीदा लेखक
मेरे विचार से
जहां जो अच्छा दिखे
उसे देख लेना चाहिए
जो अच्छा लिखा मिले
उसे पढ़ लेना चाहिए
अब चाहे वह कोई किताब हो, अखबार हो, पत्रिका हो,
दीवार हो, ट्रक के पीछे लिखी कोई शायरी हो
जहां जो अच्छा सुनने को मिले
उसे सुन लेना चाहिए
अब चाहे वह कोई फिल्मी गीत हो, कविता हो, कहानी हो, भजन हो, गजल हो, किसी वाद्य यंत्र की ध्वनि हो, किसी गाड़ी का हॉर्न हो,
किसी की बेबाक हंसी हो,
किसी बच्चे का रुदन हो आदि
अपनी समस्त इंद्रियों से
जितना हो सके
ग्रहण करते रहना चाहिए
एक किताब या
एक लेखक तक सीमित नहीं
हो जाना चाहिए हालांकि
कुछ किताबें या लेखक
लोगों के जीवन की दिशा तक
बदलने का सामर्थ्य रखते हैं
कहने का तात्पर्य यह है कि
अपने को कहीं बांधे नहीं
सीमित न करें
किसी के प्रभाव में न आयें बल्कि
अपने ज्ञान चक्षु को खुला रखकर
खुद की सोच को व्यापक बनायें
अधिक से अधिक पढ़ने की,
सुनने की, लिखने की,
समझने की,
देखने की चेष्टा करें
मुंह पर अंगुली रखकर यानी
खामोश रहकर
हर चीज को सूंघकर
उसको कहीं गहरा अपने
अंतर्मन में उतारकर
उसका स्वाद चखने का भी
भरसक प्रयत्न करें।


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